DRDO क्या है? what is DRDO ? जानिए DRDO के बारे में पूरी जानकारी हिन्दी में |

DRDO (डीआरडीओ) का full form: Defence Research & Development Organization (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन)

क्या आप जानते हैं DRDO का पूरा नाम क्या है और DRDO क्या है ? तो आपको बता दें की किसी भी देश की मजबूती और शक्ति का आंकलन इस बात से लगाया जा सकता है कि उस देश की सैन्य और विज्ञान शक्ति कितनी कमजोर अथवा मजबूत है | देश तब और भी ज्यादा सुरक्शित हो जाता है जब सैन्य शक्ति और विज्ञान शक्ति परस्पर सहयोगी आधार निर्मित करें| हमारे देश में इस परस्पर सहयोगी आधार का निर्माण DRDO नामक संस्था के द्वारा किया जाता है|  


DRDO क्या है ?

DRDO यानि "Defence Research & Development Organization" एक भारतीय संगठन है| भारत की Defence Power को मजबूत बनाने में  भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का सबसे बड़ा योगदान है| DRDO भारत की रक्षा शक्ति से संबन्धित रिसर्च करती है और देश के रक्षा तंत्र को मजबूत बनाती है| यह संस्था विश्व स्टार के हथियार, प्रणालियों और उपकरणों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर नए भारत का एक चेहरा है |

DRDO की स्थापना 10 प्रतिष्ठानों और अन्य प्रयोगशालाओं के संगठन से हुयी है| वर्तमान में इस संगठन की पूरे देश में 51 प्रयोगशालाएँ हैं; जो इलेक्ट्रोनिक, तकनीक और रक्षा उपकरण इत्यादि के क्षेत्र में कार्यरत हैं|

DRDO  का प्रमुख उद्देश्य भारत को World Class विज्ञान और तकनीकी का मजबूत आधार प्रदान कर Defence Services को सुदृढ़ बनाना है|

तो यह था डीआरडीओ के बारे में संक्षिप्त परिचय, चलिये अब आपको DRDO के इतिहास से संबन्धित कुछ महत्वपूर्ण बातों से रूबरू कराते हैं |

DRDO का इतिहास :

DRDO का इतिहास काफी पुराना है | DRDO की स्थापना (Est. Of  DRDO) 1958 में भारत की सैन्य शक्ति को मजबूती प्रदान करने के लिए की गयी थी और तब इसे भारतीय थल सेना तथा रक्षा विज्ञान के तकनीकी विभाग के रूप में स्थापित किया गया था|



यह संस्था रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है| भारत सरकार के रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार जो सामान्यतः अनुसंधान और विकास के निदेशक तथा रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव होते हैं, के द्वारा इस संगठन का नेतृत्व किया जाता है|

DRDO के कार्य :

DRDO मिसाइलों, हथियारों, हल्के लड़ाकू विमान, रडार और इसके साथ ही कई इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों को लगातार विकसित कर रहा है, जिसके माध्यम से सेना को मजबूती प्राप्त होती है।

इसके अलावा आपको बता दे कि जरूरत पड़ने पर यह सेना को उन सभी सुविधाओं से सुसज्जित करती है, जिसकी आवश्यकता सेना को समय के अनुसार होती है| भारतीय सेना के तीनों अंग जल, थल और वायु को आधुनिक हथियार प्रदान करने में डीआरडीओ ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है|

आज भारतीय सेना की जरूरत का हथियार का एक बड़ा हिस्सा डीआरडीओ अपने देश में ही पूरा कर पा रहा है जिसके कारण भारत का डिफेंस पर खर्च होने वाला खर्च काफी हद तक कम हुआ है और आज डीआरडीओ इतना सक्षम है कि इंडिया दूसरे देशों को हथियार बेचना शुरू कर चुका है।



 


DRDO से संबन्धित प्रश्न :

  • DRDO की स्थापना : डीआरडीओ की स्थापना सन 1958 में भारत की सैन्य शक्ति को मजबूत करने की लिए की गयी थी
  • DRDO Join करने के लिए Qualification: डीआरडीओ के लिये योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/संस्थान से Engineering And Technology में बैचलर डिग्री के साथ Science, Maths, Psychology में न्यूनतम प्रतिशत 60% अंकों के साथ Master डिग्री होना अनिवार्य है।
  • डीआरडीओ का मुख्यालय: DRDO का मुख्यालय दिल्ली के राष्ट्रपति भवन के निकट स्थित है।
  • DRDO कितने साल का कोर्स : DRDO में काम करने के इच्छुक व्यक्ति CET, CEPTAM, SET की परीक्षा पास कर अपना साइंटिस्ट बनने का सपना पूरा कर सकते है। इसके लिए आवेदक की उम्र 18 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिये।
  • DRDO का अध्यक्ष : डीआरडीओ के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. जी .सतीश रेड्डी हैं।
  • डीआरडीओ का मोटो: डीआरडीओ का मोटो “बलस्य मूलं विज्ञानम” है यानि “शक्ति का आधार विज्ञान है।” अंग्रेजी में इसे “Strength’s Origin is in Science” कहा जाता है।

 निष्कर्ष -

DRDO भारत की रक्षा प्रणालियों की Design और Development में लगातार कार्यरत है। यह जल, थल और वायु सेवाओं को विश्व स्तरीय Weapon System उपलब्ध कराता है और मिलिट्री टेक्नोलॉजी के कई क्षेत्रों में काम करता है। 1960 में DRDO ने भारत को अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग मिसाइल सहित कई मिसाइलों को विकसित करने की योजना दी जिससे हमारे देश की शक्ति के साथ गौरव भी बढ़ा।

उम्मीद है दोस्तों, आपको हमारी पोस्ट DRDO क्या है? what is DRDO ? पसंद आयी होगी और इस पोस्ट में DRDO के बारे में उपयोगी जानकारी मिली होगी। हमारा लेख आपको कैसा लगा हमे कमेंट कर ज़रूर बताएं, आप इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ साथ Social Media पर भी  शेयर कर सकते हैं। हमारा पोस्ट अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।